बिग बॉस
पिछले कई सप्ताहों से मैं यह सीरियल देखती आ रही थी।मनुष्य की भावनाओं का मनोवैज्ञानिक अध्ययन करने का बड़ा ही रुचिकर माध्यम देखने को मिला। राखी सावंत के व्यवहार ने आधुनिक समाज के बदलते तेवर का सीधा सपाट खुळासा कर डाला। कामयाबी की खोज में कुछ भी करने को तैयार युवा ईमानदारी की दुहाई देते दिखे। रवि भैया अपनेआप को ही कर्ता धर्ता
मानते रहे। रूपाली जी दूसरों की निगाह में अच्छा बनने के लिए सबके पैर दबाती दिखीं। अनुपमा और आर्यन की टूटी जोड़ी दर्शकों को स्तब्ध कर गई। आम आदमी अचानक सोचने को मजबूर हो गया कि हम क्या इतने बनावटी हो गये हैं?
सहजता हमसे सिमट कर दूर जा रही है। हमें उसे वापस लाना होगा।
पिछले कई सप्ताहों से मैं यह सीरियल देखती आ रही थी।मनुष्य की भावनाओं का मनोवैज्ञानिक अध्ययन करने का बड़ा ही रुचिकर माध्यम देखने को मिला। राखी सावंत के व्यवहार ने आधुनिक समाज के बदलते तेवर का सीधा सपाट खुळासा कर डाला। कामयाबी की खोज में कुछ भी करने को तैयार युवा ईमानदारी की दुहाई देते दिखे। रवि भैया अपनेआप को ही कर्ता धर्ता
मानते रहे। रूपाली जी दूसरों की निगाह में अच्छा बनने के लिए सबके पैर दबाती दिखीं। अनुपमा और आर्यन की टूटी जोड़ी दर्शकों को स्तब्ध कर गई। आम आदमी अचानक सोचने को मजबूर हो गया कि हम क्या इतने बनावटी हो गये हैं?
सहजता हमसे सिमट कर दूर जा रही है। हमें उसे वापस लाना होगा।
